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शर्म से नहीं हक से मांगिये कॉन्डोम, ये आपकी सुरक्षा का मामला जो है

पिछले दिनों एक खबर पढ़ी कि अब से दिन के समय में टेलीविजन पर कॉन्डम के विज्ञापन नहीं दिखाए जाएंगे। एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को यह सुझाव दिया है कि मंत्रालय सभी टेलीविजन चैनलों को रात 10 बजे से सुबह 6 बजे की बीच ही कॉन्डम के विज्ञापनों को प्रसारित करने का आदेश दे। यह सुझाव सनी लियोन के कॉन्डम विज्ञापन के खिलाफ आई शिकायत के बाद दिया गया है।

कॉन्डम के एक विज्ञापन में सनी लियोन; फोटो आभार: मैनफोर्स फेसबुक पेज

एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड काउंसिल ऑफ इंडिया (ASCI) एक ऐसा संगठन है जो भारत में विज्ञापन क्षेत्र की निगरानी करता है। इसके पास सिर्फ सनी लियोन के विज्ञापन के खिलाफ ही शिकायत नहीं आयी थी, बल्कि कई अन्य कॉन्डम विज्ञापनों को लेकर भी इनके पास शिकायत पहुंची थी। ASCI के अनुसार इस तरह के विज्ञापन सिर्फ अडल्ट्स के लिए ही बनाए जाते हैं, इसलिए इन्हें दिन के समय में दिखाया जाना सही नहीं है। इससे बच्चे भी इन विज्ञापनों को देखते हैं, जिसका उन पर बुरा असर पड़ सकता है।

भारत में कॉन्डम, सैनेटरी पैड और सेक्स टॉयज़ जैसी चीज़ें अभी भी टैबू बनी हुई हैं। लोग अभी भी स्टोर से इन चीजों को खरीदने में शर्म महसूस करते हैं, ज़्यादातर लोग सेक्स से जुड़ी कोई भी चीज़ अकेले में खरीदना ही पसंद करते हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के मुताबिक सर्वे में शामिल हुए लोगों में से सिर्फ 5.6% लोग ही परिवार नियोजन के लिए कॉन्डम का इस्तेमाल करते हैं। कोलकाता में 19%, दिल्ली में 10% और बेंगलुरु में सिर्फ 3.6% लोग कॉन्डम का इस्तेमाल करते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 54% महिलाओं और 77% पुरुषों ने स्वीकार किया कि कॉन्डम के प्रयोग से यौन रोगों से बचाव होता है। भारत में कॉन्डम्स की सालाना सेल 200 से 220 करोड़ के बीच है।

कुछ महीने पहले एड्स हेल्थकेयर सोसायटी ने ऑनलाइन फ्री कॉन्डम स्टोर लॉन्च किया, इस स्टोर से सबसे अधिक डिलिवरी दिल्ली और कर्नाटक में देखने को मिली। 69 दिनों में 10 लाख कॉन्डम्स ऑनलाइन ऑर्डर किए गए। इसकी वजह शायद यह रही हो कि ऑनलाइन कॉन्डोम ऑर्डर करते समय किसी के द्वारा देखे जाने की टेंशन लोगों को नहीं थी, साथ ही उन्हें अपनी मर्ज़ी और अपनी पसंद के मुताबिक कॉन्डोम सेलेक्ट करने की छूट थी। इसके अलावा जो व्यक्ति घर पर डिलीवरी करने आएगा, उसे भी इस बात की जानकारी नहीं रहती कि बंद पैकेट में क्या और किस तरह का प्रॉडक्ट है, इसलिए झिझक या शर्म जैसी कोई बात ही नहीं।

कमाल की बात है ना! जिस भारत ने दुनिया को कामसूत्र जैसी किताब दी, जहां खजुराहों के मंदिरों में स्त्री-पुरुषों के शारीरिक संबंधों को इतनी खूबसूरती से उकेरा गया हो, उसी देश के लोग आज इन मुद्दों पर बात करने से भी हिचकते हैं। वैसे ASCI को क्या लगता है कि आज के इस तकनीकी युग में जहां हर तरह की जानकारी बड़ों से लेकर बच्चों के पास भी एक क्लिक में मौजूद है, वहां बच्चों को आप इन चीजों के बारे में जानने या इनके विज्ञापनों को देखने से रोक पाएंगे? शायद नहीं।

मनोविज्ञान कहता है कि इंसान स्वभाव से जिज्ञासु प्रवृति का होता है, उसमें शुरू से ही उन चीजों के बारे में जानने की असीम उत्कंठा रही है, जो अदृश्य, आलौकिक या पर्दे के पीछे हैं। उसकी इस जिज्ञासा का ही परिणाम है कि आज वह चांद-सितारों तक अपनी पहुंच बनाने में कामयाब हुआ है और आगे भी हर रोज़ नए-नए खुलासे कर रहा है। ऐसी स्थिति में आज ज़रूरत इन चीजों को छिपाने के बजाय उनके बारे में लोगों में स्वस्थ जागरूकता फैलाने की है।

अगर डर इस बात का है कि बच्चे इस बारे में सवाल पूछेंगे, तो भई पूछने दीजिए न उन्हें सवाल। ये तो उनका काम ही है और आपका काम है उन सवालों का उनकी उम्र के अनुसार तार्किक जबाव देना, न कि उन्हें झिड़ककर चुप करा देना या उनसे किसी जानकारी को छिपाना।

जिन्हें ये समझ नहीं आता कि बच्चों को इन मुद्दों के बारे में क्या और कैसे बताएं, उन्हें यूट्यूब पर सेक्स चैट विद पप्पू एंड पापा (Sex Chat with Pappu & Papa) के एपिसोड्स देखने चाहिए। इस वीडियो वेब सिरीज़ में केवल कॉन्डोम के बारे में ही नहीं, बल्कि मास्टरबेशन, प्रेगनेंसी, होमोसेक्शुएलिटी और पीरियड्स जैसे उन तमाम मुद्दों के बारे में एक पिता और बेटे के बीच हल्के-फुल्के संवाद और मज़ाकिजा अंदाज़ में बड़ी ही आसानी और खूबसूरती से बताया गया है। इसमें बच्चों के उन सारे सवालों के जवाब दिए गए हैं, जिनसे आप या हम अब तक बचने की कोशिश करते आए हैं।

याद कीजिए, कुछ साल पहले तक मेंस्ट्रूएशन और एड्स जैसे विषय भी शर्म और झिझक का कारण बने हुए थे, लेकिन आज जैसे-जैसे लोग इनके बारे में जान रहे हैं, इनसे जुड़ी शर्म, झिझक या टैबूज़ खत्म हो रहे हैं। इसलिए जनाब सूचना क्रांति के इस युग में हमारे समक्ष चुनौती सूचनाओं को छिपाने या उनसे दूर भागने की नहीं, बल्कि सही और सटीक सूचनाएं देने की है।

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Written by Anadkat Madhav

I am a software engineer, project manager, and Mobile Application Developer currently living in Rajkot, India. My interests range from technology to entrepreneurship. I am also interested in programming, web development, design, Mobile Application development.

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